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मिडिल ईस्ट संकट पर मंथन
Delhi दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में गुरुवार शाम आयोजित केंद्रीय मंत्रिपरिषद की बैठक करीब साढ़े चार घंटे तक चली। यह बैठक ‘सेवा तीर्थ’ में हुई, जिसमें सभी कैबिनेट मंत्री, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और अन्य राज्य मंत्री शामिल हुए। इसे सरकार के तीसरे कार्यकाल का पहला व्यापक मिड-टर्म रिव्यू माना जा रहा है। बैठक में देश के विकास, सुधारों और प्रशासनिक कामकाज की समीक्षा की गई। नौ प्रमुख मंत्रालयों ने अपने कार्यों पर विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया, जिनमें वाणिज्य, पेट्रोलियम, गृह, वित्त और विदेश मंत्रालय प्रमुख रहे। मंत्रालयों से कहा गया था कि वे अपने सुधारों को कानून, नियम, नीति और कार्य प्रणाली में बदलाव के आधार पर प्रस्तुत करें।
प्रधानमंत्री मोदी ने मंत्रियों को 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को ध्यान में रखकर काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने ‘ईज ऑफ लिविंग’ यानी आम नागरिकों के जीवन को आसान बनाने, बड़े सरकारी प्रोजेक्ट्स की निगरानी और मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया। बैठक में पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी तनाव और उसके भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर पर भी चर्चा हुई। खासतौर पर ऊर्जा, कृषि, खाद, एविएशन, शिपिंग और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों पर संभावित प्रभाव को लेकर सरकार ने सतर्कता बढ़ाने पर जोर दिया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने प्रधानमंत्री के हालिया पांच देशों के दौरे की जानकारी भी मंत्रियों के साथ साझा की और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिले नतीजों पर प्रकाश डाला।
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